लेटर बम निकला ‘फुस्स’, बयान के बाद सियासत में पलटवार तेज, गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय ने लेटर को बताया झूठ का पुलिंदा

  • अरविंद पांडेय के बयान के बाद बैक फुट पर कांग्रेस
  • गोदियाल के खिलाफ केस दर्ज करवाएगी भाजपा?
  • फेक नेरेटिव को लेकर गणेश गोदियाल पर उठने लगे सवाल!

देहरादून। प्रदेश की सियासत में जिस “लेटर बम” ने अचानक हलचल मचा दी थी, अब वही खुद सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है। गदरपुर से विधायक अरविंद पांडेय ने सामने आकर पूरे मामले पर विराम लगाने की कोशिश की और साफ-साफ कहा “ना मैंने कोई पत्र लिखा है और ना ही उसमें लगाए गए आरोपों का कोई आधार है।” एक बयान ने उस पूरे सियासी तूफान की हवा निकाल दी, जिसे पिछले कई दिनों से कांग्रेस बड़ा मुद्दा बनाकर हल्ला मचा रही थी।

दरअसल, मामला तब गरमाया जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह दावा किया कि भाजपा के गदरपुर विधायक ने अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ गंभीर आरोपों वाला पत्र लिखा है। इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई, चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाने की पूरी कोशिश की।

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लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब खुद कथित पत्र के लेखक बताए जा रहे अरविंद पांडेय ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे न सिर्फ “मनगढ़ंत” बताया, बल्कि यह भी कहा कि यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत गढ़ा गया झूठा नैरेटिव है, जिससे उनकी छवि और सरकार दोनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी घेरने का प्रयास हुआ, लेकिन पांडेय के बयान के बाद अब सियासी समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं। जिस मुद्दे के जरिए सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश थी, वही अब विपक्ष के लिए असहज स्थिति पैदा करता नजर आ रहा है।

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अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह “लेटर बम” सच में कोई खुलासा था, या फिर बिना बारूद का पटाखा, जो आवाज तो करता है लेकिन असर नहीं छोड़ता? और अगर यह नैरेटिव गढ़ा गया था, तो आखिर किस आधार पर और किस जल्दबाजी में?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब कांग्रेस के भीतर भी इसको लेकर असंतोष की आहट सुनाई देने लगी है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि बिना ठोस सबूत के इस तरह के आरोप सार्वजनिक करना पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। पहले से जनाधार के संकट से जूझ रही कांग्रेस के लिए यह प्रकरण कहीं आत्मघाती साबित न हो जाए।

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इसी बीच सियासी तापमान को और बढ़ाते हुए भाजपा खेमे में अब इस पूरे मामले को लेकर कानूनी विकल्पों पर भी विचार शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी गणेश गोदियाल के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करने पर मंथन कर रही है। यदि ऐसा होता है तो यह विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी मोड़ भी ले सकता है।

कुल मिलाकर, जो मामला सरकार के लिए मुश्किल खड़ी करने वाला बताया जा रहा था, वह अब विपक्ष के लिए ही असहज सवालों की वजह बन गया है। सियासत में ‘नैरेटिव’ जितनी तेजी से बनते हैं, उतनी ही तेजी से टूटते भी हैं और इस बार, यह टूटन काफी शोर के साथ देखने को मिल रही है।

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